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वो चार बच्चे!


नवीन मेरी बात ध्यान से सुन रहा है, मैं चाहती हूं कि मनीष भी मेरी बात ध्यान से सुने। रोहित दूर से भी अच्छे से देख सकता है और सुन सकता है तो मैं चाहती हूं कि रोहित पीछे वाले कोने में जाकर बैठे (क्योंकि रोहित अपने आस पास वाले बच्चों को बहुत ज्यादा परेशान कर रहा था)। प्रिंस हम सबको बताएगा कि हमारी आज की क्लास में प्रिंस की क्या समझ बनी है और अभिषेक आप मुझे सभी बच्चों में वर्कशीट बांटने में मदद करेंगे।


प्रिंस रोहित अभिषेक और मनीष मैं आप चारों के लिए आज बहुत मजेदार वर्कशीट बना कर लाई हूं तो आप चारों को वह आज करनी होगी |

अभिषेक और मनीष आज आप लोगों को मिलकर अपनी पसंद की ड्राइंग करनी होगी। जैसी भी आपको बनानी पसंद हो पर आप ड्राइंग किसी को बिना परेशान किए शांति से बैठकर बनाएंगे।


मनीष, अभिषेक, प्रिंस तथा रोहित यह चार बच्चे अलग - अलग कक्षा और उम्र के हैं पर इन चारों का व्यवहार एक जैसा है। इनको मस्ती करना ज्यादा पसंद है और हमेशा इनको कुछ नया करने के लिए नया चाहिए होता है। इनको कक्षा में एक जगह बैठकर पढ़ना बिल्कुल पसंद नहीं है। जिस कारण से इनको सब बोलते हैं ये बिल्कुल भी पढ़ाई नहीं करते हैं।


इस प्रकार के बच्चे तो हमें प्रत्येक स्कूल और कक्षा में देखने को मिल ही जायेंगे। स्कूल या कक्षा में इन बच्चों को एक अलग ही नजर से देखा जाता है। इन्हें हमेशा ही कहा जाता है तुम कुछ नहीं कर सकते हो, तुम हमेशा ऐसे ही रहोगे, तुम अच्छे बच्चे नहीं हो या इनको कक्षा से बहार ही निकाल दिया जाता है।

पर क्या कभी किसी ने इन से जानने की कोशिश की है कि यह ऐसा क्यूं कर रहे हैं? और इनकी समस्या समझकर किसी ने सुनी है | चलो आज हम कुछ ऐसे ही बच्चों की कहानी सुनते हैं और यह भी जानने की कोशिश करते हैं कि टीचर्स इनके साथ इस तरह का व्यवहार क्यों करते हैं | क्या उनको यह करना अच्छा लगता है, या उनके पास और कोई उपाय नहीं होता इसके अलावा |

जब हमारी समर कैंप की कक्षा चल रही होती तो ये चार बच्चे कक्षा के बहार आ जाते थे और कक्षा के बहार रखी बच्चों की स्लीपर्स फैंकना, बहार दरवाजे पर पत्थर फैंकना और बच्चों को परेशान करना शुरु कर देते थे | जब मैंने इन से बात की तो निकल कर आया कि इनको भी कक्षा में आना है, तो मैंने इन्हें कक्षा में आने के लिए हां बोल दिया। पर इनको कक्षा में आकर बैठना और पढ़ना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था और फिर वही बच्चों को परेशान करना चीज़े इधर से उधर फैंकना शुरू कर देते थे | जब ये बच्चे बहुत ज्यादा परेशान कर रहे होते थे, तो मैं वहीं टीचर्स के बारे में सोचना शुरु कर देती थी कि उन लोगों के लिये भी तो इनको संभालना कितना मुश्किल होता होगा । और तो और उस टाइम कक्षा में और भी बच्चे होते होंगे जिनकी पढाई पर भी असर पड़ता होगा | तो शायद टीचर इसीलिए उनको कक्षा के बहार भेजते होंगे या पीटते होंगे जिससे दूसरे बच्चों की पढाई तो हो पाए | इसके साथ ही टीचर्स को इसके अलावा कोई और solution नहीं मिलते होंगे या उन्होंने वो आजमा कर देख लिए होंगे | फिर मैंने सोचा कि कुछ तो करना ही होगा, जिससे इनकी पढाई भी हो और दूसरे बच्चों को परेशान भी ना कर पायें | मैंने सोचा कि अब इनके साथ अलग - अलग बैठकर बात करनी चाहिए।


सब से पहले मैंने अभिषेक के साथ बात की और उसे समझाया कि अगर आप ऐसे ही दूसरे बच्चों को परेशान करते रहेंगे तो बच्चे यहां आना बंद कर देंगे और या आपका आना बंद करवा देंगे। इससे हमारी पढ़ाई पर भी असर पड़ेगा आप कुछ सीख नहीं पाएंगे और आपके साथ ही, इन सब बच्चों की पढ़ाई भी नहीं हो पाएगी। क्या आप ऐसा चाहते हैं? और इस कारण से सब आपको बुरा बोलेंगे क्या आप यह चाहते हैं? इस प्रकार से मैंने अभिषेक से काफी बातें की ओर उसे समझाया की आपके ऐसा करने से कितने बच्चों की पढ़ाई पर प्रभाव पड़ेगा। इसके बाद अभिषेक ने कहा कि "मैं आगे से कोशिश करूंगा कि ऐसा कुछ मैं जान - बुझ कर ना करूं। अगर गलती से हो जाता है तो आप मुझे बता देना और मैं कोशिश करुंगा कि आगे से ऐसा कुछ ना करूं। मुझे ड्राइंग करना बहुत पसंद है, जब भी मुझे ऐसा कुछ लगेगा तो मैं ड्राइंग करना शुरू कर दूंगा।" इस समस्या को सुलझाने के लिये मैंने अभिषेक से बात कि और उसकी hobby पर उसे काम करने दिया | जिससे वह खुद को motivate कर पाया पढाई के लिए |


इसके बाद ऐसे ही मेरी बात बाकी तीनों से भी हुई, पर उनके साथ ये तरीका काम नहीं किया क्योंकि सभी बच्चे अलग - अलग होते हैं | सब के सोचने, समझने और करने की क्षमतायें भी भिन - भिन होती हैं | इन तीन बच्चों के साथ काम करने का मैं कोई और तरीके ढूंढ रही हूँ और काम कर रही हूं | इसके साथ ही इन तीनों के साथ जो ideas काम करेगें वो मैं आपके साथ अगले ब्लॉग में साझा करूगीं | अगर आपके पास भी कुछ ऐसे ideas हों तो बताएँ |

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